जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को सुधार के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें से 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी प्रकार का सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में लगभग 16 करोड़ पशुओं का वध हुआ है। उन्होंने यहां तक कहा कि “देश के सबसे बड़े मांस व्यापारी योगी आदित्यनाथ हैं,” और इसे गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले नेतृत्व के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कसाई तंत्र को 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही कहा कि गेरुआ कपड़ा पहनकर वेतन लेना गलत है और यह सनातन परंपरा के विरुद्ध है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुजरात के एक विधायक द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को “असली हिंदू” बताए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिंदू होने पर भी सवाल खड़े किए।सनातनी समाज को लेकर उन्होंने कहा कि सनातनियों को शास्त्र की ओर जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे क्योंकि वे धर्माचार्य हैं, लेकिन जनता के सामने विकल्प अवश्य रखा गया है—ऐसा सनातनी नेतृत्व चुनने का जो गौ माता का रक्षक हो।उन्होंने कहा कि संत समाज सीधे नेतृत्व नहीं करता, बल्कि समाज को दिशा और प्रेरणा देता है, और यही बात वे योगी सरकार को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।बिहार का उदाहरण देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वहां सभी पार्टियों से गौ संरक्षण की मांग की गई, लेकिन जब किसी ने नहीं सुना तो निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 5 लाख 86 हजार मत प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि बड़ी संख्या में सनातनी गौ माता का संरक्षण चाहते हैं।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 30 दिन बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आने वाले उत्तर प्रदेश सहित अन्य चुनावों में गौ माता का संरक्षण ही मुख्य मुद्दा होगा और उसी को लेकर उनका अभियान आगे बढ़ेगा।

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