काशी के डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर आयोजित 58वें महामूर्ख मेले में एक अनोखा और हास्य से भरपूर दृश्य देखने को मिला, जब एक ही मंडप में विवाह और निकाह दोनों की रस्में एक साथ निभाई गईं। इस अनोखे आयोजन ने घाट पर मौजूद लोगों को ठहाकों से लोटपोट कर दिया।कार्यक्रम में पुरोहित पं. वेदमूर्ति शास्त्री ने मजाकिया अंदाज में श्लोक पढ़कर सिंदूरदान कराया, वहीं काजी सलीम शिवालवी ने कलमा पढ़ाकर निकाह की रस्म पूरी कराई। दूल्हा नीलम जोगाई और दुल्हन उमेश जोगाई का यह ‘विवाह-निकाह’ जैसे ही पूरा हुआ, वैसे ही दोनों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और मामला तुरंत तलाक तक पहुंच गया। दूल्हे ने दुल्हन पर ‘मूंछवाली’ होने का आरोप लगाते हुए तीन तलाक दे दिया, जिससे माहौल और भी हास्यपूर्ण हो गया।
मेले में विवाह की रस्मों को भी व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। पुरोहित द्वारा पढ़े गए उलटबांसी श्लोक और दुल्हन के ‘सात वचन’—जिनमें किटी पार्टी, ब्यूटी पार्लर और सिनेमा जाने जैसी शर्तें शामिल थीं—ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। वहीं काजी द्वारा दूल्हा-दुल्हन का मजाकिया परिचय भी आकर्षण का केंद्र रहा।घाट की सीढ़ियों पर बैठे दर्शक इस पूरे आयोजन के दौरान ठहाके लगाते रहे। नगाड़ों की धुन, धोबिया नृत्य और रंग-बिरंगे वेशभूषा में कलाकारों की प्रस्तुति ने माहौल को और जीवंत बना दिया।बताया गया कि महामूर्ख मेले के इतिहास में यह पहला अवसर था जब विवाह और निकाह दोनों एक साथ कराए गए और दोनों ही ‘असफल’ रहे। यह आयोजन अपनी अनोखी शैली और व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियों के लिए एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया।

