बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत पर बवाल, छात्रों ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में 71 वर्षीय महिला राधिका देवी की संदिग्ध मौत को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्रों ने इसे साधारण चिकित्सीय त्रुटि मानने से इनकार करते हुए संस्थागत लापरवाही का गंभीर मामला बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।छात्रों का आरोप है कि मरीज की पहचान से जुड़े बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। न तो आर्म बैंड लगाया गया और न ही प्री-ऑपरेटिव वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी की गई। उनका कहना है कि पूर्व में लागू इस प्रणाली को हटाने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी लागू नहीं की गई, जिससे गंभीर चूक हुई।

आरोप के मुताबिक, इसी लापरवाही के चलते जिस मरीज की न्यूरो सर्जरी होनी थी, उसे ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। छात्रों ने इसे “रोकथाम योग्य मृत्यु” करार दिया है।छात्रों ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर की प्रशासनिक जिम्मेदारी प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह के पास है, इसलिए इस मामले में उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि इतने गंभीर मामले के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाएंगे। उन्होंने स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटाने की मांग की है।






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