वाराणसी। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व गुरुवार को धार्मिक आस्था, उत्साह और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर नई सड़क स्थित लंगड़े हाफिज मस्जिद में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकत्र होकर ईद की विशेष नमाज अदा की। नमाज की इमामत मौलाना जकिउल्लाह कादरी ने की।सुबह से ही मस्जिद परिसर में नमाजियों का पहुंचना शुरू हो गया था। निर्धारित समय पर नमाज अदा की गई, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की। नमाज के बाद मौलाना जकिउल्लाह कादरी ने खुतबा पेश करते हुए ईद-उल-अजहा के धार्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बकरीद का पर्व हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जो अल्लाह की राह में समर्पण और आज्ञापालन का सर्वोच्च उदाहरण है।
मौलाना ने कहा कि ईद-उल-अजहा केवल जानवर की कुर्बानी का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर मौजूद बुराइयों, अहंकार और स्वार्थ का त्याग करने का भी संदेश देता है। उन्होंने लोगों से प्रेम, भाईचारे, आपसी सौहार्द और मानवता की भावना को मजबूत करने की अपील की।नमाज के बाद विशेष दुआ का आयोजन किया गया, जिसमें मौलाना जकिउल्लाह कादरी ने अल्लाह तआला से मुसलमानों द्वारा दी गई कुर्बानियों को कबूल फरमाने की प्रार्थना की। इसके साथ ही देश की तरक्की, समाज में अमन-चैन, खुशहाली, आपसी भाईचारे और विश्व शांति के लिए भी दुआ मांगी गई।
नमाज समाप्त होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी। मस्जिद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला। बच्चों और युवाओं में भी त्योहार को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। इसके बाद लोगों ने अपने-अपने घरों में कुर्बानी की रस्म अदा की तथा जरूरतमंदों और गरीबों के बीच मांस वितरित कर सामाजिक समरसता और सेवा भाव का परिचय दिया।त्योहार के दौरान क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी सतर्क रहा। स्थानीय लोगों ने भी आपसी सहयोग और सौहार्द के साथ पर्व को शांतिपूर्वक संपन्न कराया।


