संतमत अनुयायी आश्रम मठ गड़वाघाट की शाखा सरयाँ, जो वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी सद्गुरूसरनानन्द जी महाराज की मातृभूमि एवं जन्मस्थली है, वहां नवीनीकरण एवं सुंदरीकरण के बाद पहली बार स्वामीजी के आगमन पर श्रद्धा और उत्साह का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में भक्ति, आध्यात्मिक उल्लास और गुरु भक्ति का वातावरण छाया रहा।स्वामीजी के स्वागत के लिए आश्रम से करीब एक किलोमीटर पहले से ही मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े होकर पुष्पवर्षा और जयघोष करते रहे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने “स्वामीजी की जय” के नारों के साथ अपने आराध्य का भावपूर्ण स्वागत किया।
अपनी जन्मभूमि पर पहुंचे स्वामीजी ने सर्वप्रथम नवनिर्मित “सद्गुरु निवास” भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने “गुरु मंदिर” का लोकार्पण किया, जहां संत परंपरा के गुरुओं की चित्र श्रृंखला स्थापित की गई है। पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर को श्रद्धालुओं को समर्पित किया गया।सायंकाल आश्रम परिसर फूल-मालाओं और आकर्षक विद्युत सज्जा से जगमगा उठा। आयोजित संध्या वंदन कार्यक्रम में पुष्पों से सुसज्जित मंच पर विराजमान स्वामीजी की आरती एवं पूजा-अर्चना की गई। गुरुवंदना, महाआरती और भजन-कीर्तन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस दौरान स्वामीजी ने कहा कि कलियुग में मानव जीवन की मुक्ति का मार्ग नाम स्मरण, सत्संग और मानव सेवा से होकर गुजरता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सच्ची आस्था और विश्वास के साथ सेवा एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।करीब दो घंटे तक चले भजन-कीर्तन के बाद श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। अगले दिन प्रातः पूजा-अर्चना एवं मंगल वंदना के पश्चात श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरुदेव को भावभीनी विदाई दी।कार्यक्रम में आश्रम के सचिव प्रकाशध्यानानन्द, धर्मदर्शनानन्द, हरिख्यानानन्द, दिव्यदर्शनानन्द, रूहानीप्रेमानन्द सहित आश्रम परिवार के महात्माजन, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


