यमुना के बाढ़ क्षेत्र (फ्लड प्लेन) में बसी 91 अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि ‘जोन-ओ’ में किसी भी तरह का रिहायशी निर्माण पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे किसी भी हाल में मंजूरी नहीं दी जा सकती।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन कॉलोनियों के भविष्य को लेकर जवाब मांगा है। साथ ही दिल्ली सरकार, डीडीए और एमसीडी को निर्देश दिया गया है कि वे मिलकर इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति तैयार करें।
जानकारी के अनुसार, इन 91 कॉलोनियों में बड़ी आबादी निवास कर रही है और हजारों मकान बने हुए हैं। हालांकि सरकार ने पहले कई अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन यमुना फ्लड प्लेन क्षेत्र की कॉलोनियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।अदालत ने यह भी साफ किया कि यह क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है और यहां किसी भी तरह का नया निर्माण, मरम्मत या विस्तार स्वीकार नहीं होगा। कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल इन कॉलोनियों को सीमित समय के लिए अस्थायी राहत मिली हुई है, लेकिन कोर्ट ने संकेत दिया है कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को अपनी विस्तृत कार्ययोजना पेश करनी होगी।


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