आल इंडिया आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और उत्तर प्रदेश आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र के आह्वान पर आदिवासी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “आदिवासी विरोधी विचारधारा” का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि “हम बनवासी नहीं, आदिवासी हैं और भारत के मूलनिवासी हैं।” उन्होंने अपनी पहचान, अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।आदिवासी कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि आदिवासियों को ‘बनवासी’ कहकर उनकी ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक ओर आदिवासी संस्कृति और नृत्य को मंचों पर प्रदर्शित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर हसदेव अरण्य, केन-बेतवा लिंक, सिंगरौली, सिजिमाली, अरावली और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों के जंगल कॉरपोरेट घरानों को सौंपे जा रहे हैं।कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों की पहचान, इतिहास और संस्कृति को बदलने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे बिरसा मुंडा के संघर्ष और जयपाल सिंह मुंडा के विचारों के वारिस हैं और “न जंगल कटने देंगे, न आदिवासियों को बंटने देंगे”।


