उत्तर प्रदेश में चल रही जनगणना प्रक्रिया के तहत परिवार की परिभाषा में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब जेल में रहने वाले कैदियों की गणना उनके मूल परिवार के साथ नहीं, बल्कि ‘जेल परिवार’ के रूप में की जाएगी। ऐसे में कैदियों को उनके घर के परिवार की जनगणना में शामिल करने की आवश्यकता नहीं होगी।जनगणना के पहले चरण में मकानों की गणना और नजरी नक्शा तैयार करने का कार्य तीन दिनों में पूरा कर लिया गया है। सोमवार से दूसरे चरण में व्यक्तियों की गणना और घरों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी एकत्र करने का कार्य शुरू होगा।
अधिकारियों के अनुसार इस बार परिवार की पहचान ‘एक रसोई’ के आधार पर की जाएगी। यानी एक रसोई से भोजन करने वाले सभी लोगों को एक परिवार माना जाएगा। वहीं, ऐसे संस्थानों में रहने वाले लोग जो एक ही रसोई से भोजन प्राप्त करते हैं, उन्हें ‘संस्थागत परिवार’ की श्रेणी में रखा जाएगा।जेलों के अलावा बोर्डिंग हाउस, मेस, हॉस्टल, बचाव गृह, निगरानी गृह, भिखारी गृह, आश्रम, वृद्धाश्रम, बाल गृह और अनाथालय जैसे संस्थानों को भी संस्थागत परिवार की श्रेणी में शामिल किया गया है। हालांकि यदि संस्था में रहने वाले कर्मचारी अलग कमरों में रहकर अपना अलग भोजन बनाते हैं, तो उन्हें अलग परिवार माना जाएगा।जनगणना अभियान को प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन अब रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का भी सहयोग लेगा। इस संबंध में अधिकारियों की बैठक आयोजित की जा रही है, ताकि जनगणना कार्य को सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।


