मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस का हल्ला बोल, आयोग ने मांगा 2 घंटे में फैसला लेने की बात कही  

मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मामले को लेकर कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की। आयोग से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस आधार पर खारिज किया गया, उसका कानून में कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था, जिसकी जानकारी उन्हें नामांकन पत्र में देनी आवश्यक होती।

सिंघवी के अनुसार, हैदराबाद की अदालत ने केवल एक नोटिस जारी किया था, जिसमें यह तय किया जाना था कि मामले में आगे सुनवाई शुरू की जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि जब तक मजिस्ट्रेट किसी मामले का संज्ञान नहीं लेते, तब तक उसे आपराधिक मामला नहीं माना जाता। कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनावी नियमों के तहत उम्मीदवारों को केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान हो और अदालत आरोप तय कर चुकी हो। उनके मुताबिक, मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी, फिर भी नामांकन रद्द कर दिया गया। सिंघवी ने आयोग से रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई उम्मीदवारों को समान अवसर से वंचित करती है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के पास ऐसे फैसलों को बदलने का अधिकार है और अतीत में हरियाणा तथा गुजरात के मामलों में आयोग ऐसा कर चुका है।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल थे। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि चुनाव आयोग ने दो घंटे के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद की अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को "लोकतंत्र की हत्या" और "सीट चोरी" करार दिया। इधर, भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। गेट बंद मिलने पर कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गणवेश कार्यालय के बाहर टांगकर अपना विरोध दर्ज कराया। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।


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