भिखारीपुर कला गांव स्थित पोखरे की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो से ढाई माह पहले नगर निगम ने पोखरे की आंशिक सफाई कराकर केवल जलकुंभी निकलवाई, लेकिन उसे किनारे से हटाने की जहमत नहीं उठाई। तब से लेकर अब तक निकाली गई जलकुंभी और अन्य मलबा पोखरे के किनारे ही पड़ा है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सफाई अभियान के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने पोखरे के संरक्षण, नियमित सफाई और क्षेत्र के विकास का आश्वासन दिया था। जनप्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन इसके बाद सफाई अभियान आगे नहीं बढ़ सका और पोखरा फिर से उपेक्षा का शिकार हो गया।
![]() |
| Advertisement |
ग्रामीणों के अनुसार पोखरे में आसपास के घरों का सीवरयुक्त पानी लगातार गिर रहा है, जिससे जल प्रदूषित हो रहा है। बरसात के दौरान यही गंदा पानी आसपास की गलियों और बस्तियों में फैल जाता है, जिससे जलभराव की समस्या पैदा होती है। इसके कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को आवागमन में कठिनाई होती है, वहीं मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
![]() |
| Advertisement |
स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि पोखरे के किनारे पड़े जलकुंभी और अन्य मलबे को तत्काल हटाया जाए, पोखरे की पूरी सफाई कराई जाए, सीवर का गंदा पानी उसमें गिरने से रोका जाए तथा बरसात से पहले स्थायी जलनिकासी और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।
![]() |
| Advertisement |



