काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च (एमसीपीआर) की ओर से यूनेस्को चेयर फॉर पीस एंड इंटरकल्चरल अंडरस्टैंडिंग तथा शिक्षा मंत्रालय के भारतीय राष्ट्रीय यूनेस्को सहयोग आयोग (आईएनसीसीयू) के सहयोग से 6 और 7 जुलाई को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का विषय "21वीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में शिक्षा की पुनर्कल्पना" रखा गया है। इसका आयोजन बीएचयू स्थित मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में होगा।
यह सम्मेलन यूनेस्को के वर्ष 2026-27 के स्मृति समारोह के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके शिक्षा, लोकतंत्र, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण संबंधी विचारों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा होगी। सम्मेलन में उनकी शैक्षिक दृष्टि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 और यूनेस्को की "फ्यूचर्स ऑफ एजुकेशन" पहल के संदर्भ में परखा जाएगा।
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दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों से शिक्षाविद्, नीति-निर्माता, विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ प्रशासक, शोधकर्ता, विधि विशेषज्ञ, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। इसके अलावा यूनेस्को के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा स्वीडन सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञ भी सम्मेलन में अपने विचार साझा करेंगे।
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सम्मेलन के दौरान शैक्षिक सुधार, उच्च शिक्षा प्रशासन, संस्थागत नवाचार, नैतिक नेतृत्व, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), शांति शिक्षा, विधि शिक्षा, अंतर्विषयी ज्ञान प्रणाली, लोकतांत्रिक नागरिकता और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर पांच पूर्ण अधिवेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही शिक्षा सुधारों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक राउंड टेबल पॉलिसी डायलॉग भी होगा।
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सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि होंगे। यूनेस्को एमजीआईईपी, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. ओबिजियोफोर अगिनम और बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, प्रो. प्रियंकर उपाध्याय सम्मेलन की अवधारणा और उद्देश्य पर विस्तृत प्रस्तुति देंगे।आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन शिक्षा के भविष्य, नीति निर्माण और समावेशी, तकनीक-सक्षम तथा मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था के विकास पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।



