केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। जैसे ही इस्तीफे की खबर सामने आई, आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दीपके ने मंच से इसकी घोषणा की। इसके बाद मौजूद लोगों ने नारेबाजी की और खुशी जाहिर की। इस्तीफा देशभर में नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।
मंच से लोगों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, "हमने कर दिखाया। लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने कर दिखाया। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है और जनता अगर डरने के बजाय अपने अधिकारों के लिए डटकर खड़ी हो जाए तो जवाबदेही तय कराई जा सकती है।
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दीपके ने आगे कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की बड़ी सफलता है, लेकिन उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी हैं। पहली, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। दूसरी, 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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उधर, धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की आकांक्षाओं और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी वार्ता जारी रहने की संभावना है।कॉकरोच जनता पार्टी के ट्विटर हैंडल से भी इस पूरे वाकये का वीडियो पोस्ट किया गया। सबसे पहले इसमें दीपके को फोन के जरिए जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने मंच से इसका ऐलान किया।
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