भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के साथ मिलकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजते हुए नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन और भूख हड़ताल का समर्थन किया। ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने तथा विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया कि नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद देशभर के छात्रों का परीक्षा प्रणाली से भरोसा डगमगा गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर, यूपीएसआई और लेखपाल भर्ती में कथित अपारदर्शिता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। संगठन का आरोप है कि छात्रों की आवाज को लगातार अनसुना किया गया, जिससे कई छात्र मानसिक तनाव में आए और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली।
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा कि इन मुद्दों को लेकर छात्र पिछले 12 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक समेत कई छात्र नेता पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, जिनके आंदोलन का पार्टी समर्थन करती है।
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ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई है कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाए, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त किया जाए, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूपीएसआई और लेखपाल भर्ती में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, असमय मौत का शिकार हुए छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों के लिए पेयजल, शौचालय सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए किसी भी प्रकार के उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए।
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