गो-संसद ने योगी सरकार के गौ-सेवा विज्ञापन को बताया भ्रामक, हर विधानसभा क्षेत्र में गौशालाओं की हकीकत उजागर करने का ऐलान

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गौ-संरक्षण, संवर्धन और सेवा को लेकर जारी विज्ञापन पर गो-संसद ने सवाल उठाते हुए इसे भ्रामक और जमीनी हकीकत से दूर बताया है। गो-संसद ने सरकार के ‘नीति, नीयत और नतीजे’ के दावों को खोखला करार देते हुए प्रदेश की गौशालाओं की स्थिति पर कई सवाल उठाए।गो-संसद की ओर से जारी विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में 7500 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों और 12 लाख से अधिक गौ-वंश के संरक्षण के दावे के बावजूद सड़कों और खेतों में बेसहारा गौ-वंश की समस्या बनी हुई है। संगठन ने सरकारी विज्ञापन में निजी गौशाला की तस्वीर और गुजरात की गीर नस्ल की गाय दिखाए जाने पर भी सवाल उठाया। साथ ही गौशालाओं में देशी गायों के साथ जर्सी सांड रखे जाने से नस्ल संरक्षण को लेकर चिंता जताई।

गो-संसद ने ‘नंदनी कृषक समृद्धि योजना’ और ‘नंद बाबा योजना’ समेत गोबर से ग्रीन एनर्जी और गौ-उत्पाद आधारित उद्योगों के दावों पर भी सवाल उठाए। संगठन ने सरकार से दुग्ध उत्पादन के आंकड़ों में देशी गायों के योगदान को स्पष्ट करने और गाय को केवल पशु मानने अथवा माता का दर्जा देने को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।प्रखर गोसेवाधीश पं. देवेंद्र पाण्डेय ‘गोपजी’ ने घोषणा की कि प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्थित सरकारी गौशालाओं की स्थिति और सरकार की नीतियों की जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए वीडियो तैयार कर जनता के बीच जारी किए जाएंगे।विज्ञप्ति में बताया गया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय ‘गविष्ठि यात्रा’ के दौरान उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया गया। संगठन के अनुसार, यात्रा में 14 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर करीब 1500 जनसभाएं की गईं और लगभग 18 लाख लोगों से संवाद किया गया।

गो-संसद ने आगामी दिनों में प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में ‘नोट अभियान’ चलाकर ‘अभिनव आशीर्वाद गोधाम’ की स्थापना, शारदीय नवरात्रि में काशी में ‘विशाल गो-प्रतिष्ठा यज्ञ’ और दीपावली के बाद प्रदेश के गांवों से गो-वंश के साथ लखनऊ कूच करने की घोषणा की है। संगठन ने सरकार से गौ-संरक्षण को लेकर शंकराचार्यों और आचार्यों के सुझावों को स्वीकार करने की मांग भी की है।




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