ललिता घाट से जल उठाने की परंपरा बहाल करने की मांग, 94वें जलाभिषेक की तैयारियों में जुटे यदुवंशी

सावन के प्रथम सोमवार पर काशी विश्वनाथ सहित नगर के नौ प्राचीन शिवालयों में होने वाले पारंपरिक जलाभिषेक को लेकर यादव समाज ने ललिता घाट से गंगाजल उठाने की वर्षों पुरानी परंपरा बहाल करने की मांग तेज कर दी है। इस संबंध में रविवार को दशाश्वमेध क्षेत्र में चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें जलाभिषेक यात्रा की तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।समिति के अध्यक्ष लालजी यादव 'चंद्रवंशी' ने बताया कि वर्ष 1932 से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा का इस वर्ष 94वां आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष ललिता घाट पर निर्माण कार्य के कारण यादव समाज को वहां से जल उठाने में कठिनाई हुई थी। प्रशासन ने कार्य पूरा होने के बाद पुरानी व्यवस्था बहाल करने का आश्वासन दिया था। अब घाट का निर्माण पूरा हो चुका है, इसलिए समाज की मांग है कि पूर्व की तरह ललिता घाट से ही जल उठाने की अनुमति दी जाए।

उन्होंने बताया कि यादव समाज ललिता घाट से गंगाजल लेकर मृत्युंजय महादेव, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, श्री काशी विश्वनाथ समेत शहर के नौ प्राचीन शिवालयों में पारंपरिक रूप से जलाभिषेक करता है। यह परंपरा स्वर्गीय भोला सरदार और स्वर्गीय चुन्नी सरदार द्वारा शुरू की गई थी, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ निभाया जा रहा है।बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और साफ-सफाई को लेकर भी चर्चा की गई। समिति ने प्रशासन से मांग की कि जलाभिषेक यात्रा को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और ऐतिहासिक परंपरा शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।

Advertisement 

Advertisement 

Advertisement 










Post a Comment

Previous Post Next Post