जेठ माह की पूर्णिमा तिथि पर श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा जी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य महाभिषेक एवं विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। इस दौरान 108 कलशों के पवित्र जल, गंगाजल, पंचामृत एवं चंदन से भगवान का अभिषेक किया गया।परंपरा के अनुसार महाभिषेक के बाद भगवान श्री जगन्नाथ ‘अनवसर काल’ में चले जाते हैं। इस अवधि में भगवान सार्वजनिक दर्शन नहीं देते और मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं।
मंदिर पुजारियों के अनुसार अनवसर काल में भगवान की विशेष सेवा की जाती है तथा उन्हें औषधीय काढ़ा एवं हल्का भोग अर्पित किया जाता है। इसी परंपरा के तहत उनके स्वास्थ्य लाभ हेतु विशेष देखभाल की जाती है।अनवसर काल समाप्त होने के बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में श्रद्धालुओं को पुनः दर्शन देंगे, जिसके उपरांत भव्य रथयात्रा महोत्सव का आयोजन होगा।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाभिषेक में भाग लेकर सुख, समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।



