वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एक ओर जहां मेधावी छात्रों को सम्मानित किया, वहीं विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए सुधार के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जो कुछ हुआ, वह भारतीय संस्कारों के अनुरूप नहीं है।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा कि देश को सही नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि सभी ने देखा कि वहां क्या-क्या हुआ और कैसी बातें कही गईं। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और संस्कारों के विपरीत बताया।समारोह में राज्यपाल ने 26 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं उपाधियां प्रदान कीं। इनमें 17 छात्रों को दो-दो स्वर्ण पदक मिले। सम्मान के दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई के सीएमडी कैप्टन बी.के. त्यागी, विशिष्ट अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद त्यागी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि डिग्रियों की हार्ड कॉपी देने के बजाय उन्हें डिजी लॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने बताया
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इसी प्रकार के मुद्दे पूर्व में केजीएमयू और लखनऊ विश्वविद्यालय में भी सामने आए थे, जिसके बाद आधुनिक रसोईघर विकसित करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को स्वयं भोजन बनाने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
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राज्यपाल ने छात्रावासों की सुरक्षा, स्वच्छता, पुस्तकालय, सोलर लाइट और फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को गंगापुर एवं भैरोतालाब परिसर की कमियों को दूर करने के निर्देश देते हुए एक माह के भीतर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। साथ ही छात्रों से भी परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग की अपील की।



