उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई एमबीए छात्रा बबीता पांडे को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'परियों के देश' वाली कहानी को तथ्यहीन बताया गया है। प्रशासन और जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है कि बबीता के लापता होने का संबंध स्थानीय लोककथाओं से हो।
जानकारी के अनुसार, बबीता पांडे 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। गोई बेस कैंप से वह देर रात रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गईं। घटना के बाद पुलिस, एसडीआरएफ, सेना, डॉग स्क्वायड, ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से लगातार तलाश अभियान चलाया गया, लेकिन 38 दिन बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
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सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि बबीता को 'परियों के देश' कहे जाने वाले खैंट पर्वत की परियां अपने साथ ले गईं। हालांकि, यह दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। खैंट पर्वत टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित है, जबकि बबीता उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता हुई थीं। दोनों स्थानों के बीच 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी है और जांच में दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है।
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इस मामले की जांच के दौरान ट्रेकिंग परमिट में भी अनियमितता सामने आई है। पर्यटन विभाग के अनुसार, संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी ने नियमों का पालन नहीं किया और पुराने फिजिकल परमिट का इस्तेमाल किया था। फिलहाल जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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