अयोध्या में राम मंदिर के दान में कथित गबन की जांच अब और व्यापक हो गई है। एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड का दोबारा ऑडिट कराने का फैसला किया है। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद निर्माण कार्यों पर हुए खर्च के साथ-साथ दान में मिले सोने, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं की भी जांच की जाएगी।
मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से पुलिस हिरासत में पूछताछ जारी है। वह मंदिर में दान की गिनती से जुड़े कार्य में शामिल था। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लाखों रुपये नकद, करीब 11 ग्राम सोना, 375 ग्राम चांदी और 1,121 अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए हैं।
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जांच के दौरान एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण व प्रबंधन से जुड़े गोपाल राव से भी पूछताछ की है। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफों पर 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में फैसला होने की संभावना है।
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इस बीच, बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दोषियों को कानून और भगवान दोनों सजा देंगे। उन्होंने एसआईटी और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि मंदिरों और संतों को बदनाम करने की कोशिशों के बीच सच्चाई सामने आनी चाहिए।यह मामला 7 जून को सामने आया था। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी और जांच अभी जारी है।
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