अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में हुए युद्धविराम (सीजफायर) को खत्म घोषित करने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस अभियान में चाबहार पोर्ट सहित लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके बाद कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया गया और एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया।
चाबहार पोर्ट पर हमला
ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार पोर्ट पर कई जोरदार धमाकों की खबर है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, हमले के बाद शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा था। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि हमलों में मिसाइल लॉन्चर, सैन्य ठिकानों और अन्य रक्षा ढांचों को निशाना बनाया गया।
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ट्रंप का बयान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने फिर अमेरिकी हितों या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया तो अमेरिका उससे भी अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम सीजफायर अब समाप्त हो चुका है।
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भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक व्यापारिक पहुंच देता है। यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी अहम हिस्सा माना जाता है और चीन समर्थित ग्वादर पोर्ट के मुकाबले भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है। इसलिए इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत समेत कई देशों की नजर बनी हुई है।
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