नई दिल्ली। CJP विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) या हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया जा सकता है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं कि उनकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य केवल जवाबदेही तय करना नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य में विरोध-प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल भी तैयार किया जाना चाहिए।
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सुनवाई की पांच बड़ी बातें
1. सभी पक्षों की तय होगी जवाबदेही
CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि जांच में किसी भी पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन या ज्यादती साबित होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा किजांच में किसी भी पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन या ज्यादती साबित होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
2. स्वतंत्र जांच की जरूरत पर जोर
कोर्ट ने गंभीर चोटों, महिलाओं, वकीलों और मीडियाकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों का उल्लेख करते हुए पूछा कि स्वतंत्र जांच का आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हैं।
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3. लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन स्वाभाविक और आवश्यक हिस्सा हैं। इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के लिए स्पष्ट और समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तैयार किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
4. हिंसा करने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी
बेंच ने कहा कि जांच केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने कानून अपने हाथ में लिया या पुलिसकर्मियों पर हमला किया, तो उसकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि हमले प्रदर्शनकारियों ने किए या प्रदर्शन में शामिल हुए अन्य शरारती तत्वों ने।
5. भविष्य के लिए बने स्पष्ट दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित जांच का उद्देश्य केवल हालिया घटनाओं की सच्चाई सामने लाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और राष्ट्रीय स्तर का प्रोटोकॉल तैयार करने में भी मदद करना होना चाहिए। इससे भविष्य में जवाबदेही तय करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सुविधा होगी।
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