ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण से जुड़े 18 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 परिवारों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके आवासीय भूखंडों को अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर रखने का आदेश दिया, जबकि बाकी भूमि पर विकास कार्य जारी रखने की अनुमति बरकरार रखी है।
यह मामला वर्ष 2007 में गौतमबुद्ध नगर के इबादुल्लापुर उर्फ बादलपुर गांव की करीब 230 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा है। औद्योगिक विकास परियोजना के लिए अधिग्रहित इस जमीन को लेकर प्रभावित परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वर्ष 2010 से इन परिवारों को यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम संरक्षण मिला हुआ था।
![]() |
| Advertisement |
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह मामला असाधारण परिस्थितियों वाला है। अदालत ने माना कि संबंधित परिवार कई वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं और उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से इन्हें बनाया है। ऐसे में उनके घरों को अधिग्रहण से बाहर रखना न्यायोचित होगा।
![]() |
| Advertisement |
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित परिवार विकास प्राधिकरण से सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें नियमानुसार विकास शुल्क देना होगा। वहीं, अधिग्रहित शेष भूमि पर प्रस्तावित सार्वजनिक विकास परियोजनाओं का काम पहले की तरह जारी रहेगा।
![]() |
| Advertisement |



