वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में लगातार तीसरे दिन भी हाई अलर्ट जारी रहा। सिंहद्वार सहित पूरे कैंपस में पुलिस और प्राक्टोरियल बोर्ड की टीमें तैनात रहीं, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी ड्रोन कैमरों से की गई। प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई और आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच की गई।एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर और उसके आसपास किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। प्राक्टोरियल बोर्ड की टीमें प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार गश्त कर रही हैं। वहीं स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के अधिकारी विश्वनाथ मंदिर, मधुबन पार्क सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी बनाए हुए हैं। परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।इस बीच, शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में असंतोष देखने को मिला। छात्रों का कहना है कि हाल के वर्षों में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि हर मामले में जांच और कार्रवाई की घोषणा तो होती है, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते।
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छात्रों ने सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए या कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग उठाई।
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हालांकि, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते बीएचयू परिसर में किसी भी छात्र संगठन ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन नहीं किया। छात्रों ने अपनी नाराजगी ऑनलाइन माध्यमों से व्यक्त करते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
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