काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सोमवार को "इक्कीसवीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में शिक्षा की पुनर्कल्पना" विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जबकि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
6 और 7 जुलाई तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य उनके शैक्षिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक विचारों के आलोक में 21वीं सदी की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक विमर्श करना है।सम्मेलन के संयोजक एवं मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र, सामाजिक विज्ञान संकाय, बीएचयू के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी शिक्षा को अधिक समावेशी, मूल्यपरक, लोकतांत्रिक और समाजोपयोगी बनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधकर्ता और नीति-निर्माता भाग लेकर भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
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दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल परिवर्तन, शांति एवं लोकतांत्रिक नेतृत्व, नैतिकता एवं चरित्र निर्माण, अनुसंधान, संस्थागत स्वायत्तता, कौशल विकास तथा आजीवन अधिगम जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञ विस्तृत चर्चा करेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, नवाचारपूर्ण और समाजोन्मुख बनाने की दिशा में सार्थक सुझाव तैयार करना है।
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