तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सख्त कैद और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने 2021 में गोवा की सेशंस कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, पीड़िता के बयान और तेजपाल द्वारा भेजे गए माफीनामा ईमेल इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत हैं।

फैसले के समय तरुण तेजपाल कोर्ट में मौजूद थे। सजा सुनाए जाने से पहले उनके वकील ने अदालत से नरमी बरतने और आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की मांग की, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सके। तेजपाल ने भी अपनी उम्र 62 वर्ष बताते हुए राहत की गुहार लगाई और कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें केवल दो सप्ताह का समय देते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने मामले में पीड़िता के व्यवहार का गलत आकलन किया और आरोपी के बजाय पीड़िता को कठघरे में खड़ा कर दिया। हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण माना। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित फेस्ट के दौरान एक फाइव-स्टार होटल की लिफ्ट में तहलका की एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और रेप का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली और 2021 में गोवा की सेशंस कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। अब लगभग 13 साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई है।
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