वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से रविवार को 224 दादी भक्त इंडिगो की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए। सभी श्रद्धालु तीन दिवसीय दादी महोत्सव के लिए झुंझुनू स्थित रानी सती मंदिर जा रहे थे। यात्रा के दौरान विमान के अंदर श्रद्धालुओं के हाथों में धार्मिक झंडे नजर आए। वहीं एक बच्ची के हाथ में त्रिशूल जैसी नुकीली वस्तु दिखाई देने के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। श्रद्धालु इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E359 से सुबह 7:25 बजे रवाना हुए।
ट्रस्ट की ओर से साझा की गई तस्वीरों में विमान के अंदर श्रद्धालु सामूहिक रूप से रानी सती मंगल पाठ करते नजर आए। पुरुष कुर्ता-पायजामा और महिलाएं राजस्थानी पोशाक में थीं। ट्रस्ट के सदस्य सुरेश तुलस्यान के अनुसार मंगल पाठ के लिए श्रद्धालुओं ने मोबाइल में पहले से पाठ डाउनलोड कर रखा था और ईयरफोन के जरिए इसे सुना। उन्होंने बताया कि इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया गया और किसी तरह के प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं हुआ। हालांकि, विमान में सामूहिक धार्मिक गतिविधि के लिए पूर्व अनुमति ली गई थी या नहीं, इसे लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरलाइन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
विमान में दिखाई दिए त्रिशूल को लेकर सुरक्षा नियमों पर भी सवाल उठे हैं। हवाई यात्रा के दौरान धारदार और नुकीली वस्तुओं को केबिन में ले जाने पर सुरक्षा नियम लागू होते हैं। वहीं कपड़े का छोटा धार्मिक झंडा सामान्य तौर पर निर्धारित आकार और सुरक्षा शर्तों के तहत ले जाया जा सकता है, लेकिन उसके साथ लगा लंबा, नुकीला या धातु का डंडा जांच में रोका जा सकता है। धार्मिक वस्तु होने मात्र से सुरक्षा नियमों में छूट नहीं मिलती। ऐसे में तस्वीरों में दिखाई दे रहे त्रिशूल को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि सुरक्षा जांच के दौरान इसे विमान के अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली।


