चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में रविवार को सोनार समाज का महा समागम आयोजित हुआ। महासमागम में उत्तर प्रदेश के करीब 35 जिलों के प्रतिनिधियों के साथ मध्य प्रदेश और बिहार से भी समाज के लोग शामिल हुए। हजारों की संख्या में सोनार समाज के लोगों की मौजूदगी में सामाजिक एकता, अधिकार, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी को लेकर मंथन हुआ।समागम में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और टिकटों में हिस्सेदारी की मांग की। प्रत्येक विधानसभा में सोनार समाज की कोर कमेटी बनाने और सरकार को मांगों से संबंधित बड़ा ज्ञापन सौंपने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
वहीं, उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठी। वक्ताओं ने कहा कि सोनार समाज पारंपरिक स्वर्ण कला का वाहक है। कारीगरों और इस कला से जुड़े लोगों के संरक्षण, प्रशिक्षण, सब्सिडी, पेंशन और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष बोर्ड की जरूरत है।महासमागम में सर्राफा कारोबारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा। लूट, चोरी, डकैती और हत्या जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के साथ कारोबारियों को सुरक्षित वातावरण देने की मांग की गई। बीएनएस की धारा 317 से जुड़ी समस्याओं के समाधान और पुरानी साहूकारी लाइसेंस व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई गई।
कार्यक्रम में युवाओं, महिलाओं, कारीगरों और व्यापारियों को संगठन से जोड़ने तथा शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया गया। अंत में “गर्व से कहो हम सोनार हैं” के उद्घोष के साथ समाज की एकता और सामूहिक हित के लिए काम करने का संकल्प लिया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण नारायण सोनी ने की। स्वागत भाषण और संचालन रवि सर्राफ ने किया, जबकि प्रस्तावना किशोर सेठ और धन्यवाद ज्ञापन अरुण सोनी ने किया। इस दौरान सरिता सर्राफ, ईश्वर दयाल सिंह सेठ, राघवेंद्र सिंह चौहान समेत विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी और हजारों समाज के लोग मौजूद रहे।


